बवासीर ( PILES ), का कारण, बचाव एवं घरेलू उपचार

बवासीर के घरेलु उपचार 

 

परिचय :

बवासीर रोग का इलाज करने से पहले यह जानना आवश्यक है, कि इसके होने का क्या कारण होता है, तथा इसके लक्षण क्या हैं |

वैसे प्राचीनकाल से ही देखा जाए तो सभ्यता के विकास के साथ-साथ बहुत सारे रोग भी पैदा हुए हैं, इनमें से कुछ रोगों का इलाज तो आसान है, लेकिन कुछ रोग ऐसे भी हैं, जिनका इलाज बहुत ही मुश्किल होता है, इन रोगों में से एक रोग बवासीर भी है, बवासीर दो प्रकार की होती है |

भीतरी बवासीर :

भीतरी बवासीर हमेशा धमनियों और शिराओं के समूह को प्रभावित करती है, बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होती है, भीतरी बवासीर रोगी को तब होती है, जब वह मल त्याग करते समय अधिक जोर लगाता है, इन भीतरी मस्सों से पीड़ित रोगी मस्सों में खाज, पीड़ा, सूजन और गर्मी की शिकायत करते हैं, इस रोग से पीड़ित रोगी अधिकतर कब्ज से पीड़ित रहते हैं |

भीतरी बवासीर के लक्षण :

भीतरी बवासीर में गुदाद्वार के अन्दर सूजन हो जाती है, तथा यह मल त्याग करते समय गुदा द्वार के बाहर आ जाती है, और इसमें जलन तथा दर्द होने लगता है | इस बवासीर के कारण मल त्याग करते समय रोगी को बहुत तेज दर्द और मस्सों से खून निकलने लगता है |

बाहरी बवासीर :

बाहरी बवासीर में बवासीर  मल द्वार के बाहरी किनारे पर होती है, इस बवासीर के अनेक आकार होते हैं, इस बवासीर में मल द्वार पर मस्से एक या अनेक हो सकते हैं, यह मस्से धीरे-धीरे खून से भर जाते हैं, और मल त्याग करते समय यह मस्से फट जाते हैं, और इनसे खून निकलने लगता है, और थोड़ी देर के लिए दर्द होने लगता है |

 

बाहरी बवासीर के लक्षण :

यह बवासीर तब होती है, जब मल द्वार के पास की कोई नस फैल जाती है तथा फैलकर फट जाती है, नस की कमजोर दीवारों से खून निकलकर जम जाता है, तथा कठोर हो जाता है, रोगी को गुदा के पास दबाव और सूजन महसूस होती है,

बाहरी बवासीर में गुदाद्वार के बाहर की ओर के मस्से मोटे-मोटे दानों जैसे हो जाते हैं, जिनमें से रक्त का बहना और दर्द होता रहता है, तथा जलन की अवस्था भी बनी रहती है | देर तक कुर्सी पर बैठना और बिना शेड्यूल के कुछ भी खा लेना इसका प्रमुख कारण है, हम आपको यहाँ पर कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताएंगे जिससे बवासीर और इससे होने वाले दर्द में राहत मिल सकती है |

 

दोनों प्रकार की बवासीर होने के कारण निम्न प्रकार हैं |

बवासीर होने का मुख्य कारण पेट में कब्ज बनना है, 50 प्रतिशत से भी अधिक व्यक्तियों को यह रोग कब्ज के कारण ही होता है, कब्ज के कारण मलाशय की नसों के रक्त प्रवाह में बाधा पड़ती है, जिसके कारण वहां की नसें कमजोर हो जाती हैं, और आँतों के नीचे के हिस्से में भोजन के अवशोषित अंश अथवा मल के दबाव से वहां की धमनियां चपटी हो जाती हैं, तथा झिल्लियाँ फैल जाती हैं, जिससे व्यक्ति को बवासीर हो जाती है |

  1. यह रोग व्यक्ति को तब भी हो सकता है जब वह शौच के वेग को किसी प्रकार से रोकता है|
  2. शौच करने के बाद मलद्वार को गर्म पानी से धोने से भी बवासीर रोग हो सकता है |
  3. तेज मसालेदार तथा उत्तेजक भोजन करने के कारण भी बवासीर हो सकता है |
  4. दवाईयों के अधिक सेवन करने से भी यह रोग व्यक्ति को हो सकता है |
  5. रात के समय में अधिक जगने के कारण भी व्यक्ति को बवासीर का रोग हो सकता है |

 

दोनों प्रकार की बवासीर रोग से पीड़ित व्यक्ति का उपचार

  • बवासीर रोग का इलाज करने से लिए रोगी को सबसे पहले 2 दिन तक रसाहार चीजों का सेवन करके उपवास रखना चाहिए, इसके बाद 2 सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन का सेवन करके उपवास रखना चाहिए |

 

  • रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम के समय में 2 भिगोई हुई अंजीर खानी चाहिए और इसका पानी पीना चाहिए, फिर इसके बाद त्रिफला का चूर्ण लेना चाहिए, ऐसा कुछ दिनों तक करने से रोगी का बवासीर रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है |

 

  • दो चम्मच काला टिल चबाकर ठन्डे पानी के साथ प्रतिदिन सेवन करने से पुराना से पुराना बवासीर भी कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है |

 

  • दोनों प्रकार की बवासीर को ठीक करने के लिए कुछ उपयोगी आसन हैं, जैसे- नाड़ीशोधन, हलासन, चक्रासन, धनुरासन, इन आसन को करने से रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएगा |

 

  • एक पके केले को बीच से चीकर उसके दो टुकड़े कर लें फिर उस पर कत्था पीसकर छिड़क दें, इसके बाद उस केले को खुले आसमान के नीचे शाम को रख दें, सुबह को उस केले को शौच करने के बाद खालें, एक हफ्ते तक लगातार इसको करने के बाद भंयकर बवासीर भी समाप्त हो जाती है |

 

  • खूनी बवासीर में एक नीबू को बीच में से काटकर उसमे लगभग 4-5 ग्राम कत्था पीसकर दाल डाल दीजिए, इन दोनों टुकड़ो को रात में छत पर खुला रख दीजिए, सुबह उठकर नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद इन दोनों टुकड़ो को चूस लीजिए, पांच दिन तक इस प्रयोग को कीजिए, बहुत ही फायदा मिलेगा |

 

  • करीब दो लीटर मठ्ठा लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और थोड़ा सा सेंधा नमक जरुर मिला दें, पूरे दिन पानी की जगह यह मठ्ठा ही पियें, चार-पांच दिन तक यह प्रयोग करें, मस्से काफी ठीक हो जायेंगे |

 

  • नीम के छिलके सहित निबौरी के पाउडर को प्रतिदिन 10 ग्राम मात्रा में रोज सुबह बासी पानी के साथ सेवन करें, लाभ होगा | लेकिन इसके साथ आहार में घी का सेवन आवश्यक है, जीरे को पीसकर मस्सों पर लगाने से भी फ्फ्यादा मिलता है, साथ ही जीरे को भूनकर मिश्री के साथ मिलाकर चूसने से भी फायदा होता है |

 

  • बवासीर की समस्या होने पर आंवले के चूर्ण को सुबह-शाम शहद के साथ लेने से भी जल्दी ही फायदा मिलता है |

 

  • नीम का तेल मस्सों पर लगाने से और 4-5 बूंद रोज पीने से बवासीर में बहुत लाभ होता है |

 

  • एक चाय का चम्मच धुले हुए काले तिल ताजा मक्खन के साथ लेने से भी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है |

 

  • 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए, ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस लीजिए, प्रतिदिन सुबह इस चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर में बहुत ही आराम मिलता है |

 

  • नागकेशर, मिश्री और ताजा मक्खन इन तीनों को रोजाना बराबर मिलाकर 10 दिन तक सेवन करने से बवासीर में बहुत ही आराम मिलेगा |
  • जमीकंद को देशी घी में बिना मसाले के भुरता बनाकर खाएं शीघ्र ही लाभ मिलेगा |

 

  • सुबह खाली पेट मूली का नियमित सेवन भी बवासीर को खत्म कर देता है |

 

  • बवासीर की समस्या होने पर तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें |

 

  • इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी भी चाय, काफी, लाल मिर्च, तली हुई चीजें तथा गर्म चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए |

 

 

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